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Showing posts from July, 2020

दूसरी दुनिया की तलाश में हम

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ये और बात हैं कि अक्सर लोग "दुनिया" शब्द का इस्तेमाल अपने असीम और सर्वस्व भाव को दर्शाने के लिए करते हैं. मिसाल के तौर पर घर के बड़े-बुज़ुर्ग अक्सर कहते रहते हैं कि " हमने बहुत दुनिया देखी हैं ", जबकि उनमें से ज्यादातर लोगों ने कभी अपने शहर से बाहर भी कदम नहीं रखा होता हैं. 17 की उम्र में जिससे दिल लगाया, वो भी आये दिन बस यही कहती रहती थी कि मैं ही उसकी दुनिया हूँ.  "दुनिया" शब्द को लेकर मेरी सही समझ स्कूली शिक्षा के दौरान बनी. भूगोल की किताब के रंगबिरंगी पन्नों में गढ़ी भौतिक दुनिया. सात महाद्वीपों और पांच विशालकाय समुद्रों से मिलकर बनी दुनिया. वो दुनिया जहाँ इंसानों के हज़ारों सालों का सफर साफ़ दिखाई देता हैं. वो दुनिया जहां इंसानो ने लकीरें बनाई हुयी हैं और आये दिन इसी बात पर झगड़ते रहते हैं. इस दुनिया में भाषाएँ भी बदलती हुई संस्कृतियों के साथ खुद के स्वरुप को बदलती रही हैं. यहां धर्मों ने समाज को एक साथ पिरोया हैं पर समय-समय पर उसको बांटने का कारण भी बना हैं. इस विशाल और विविध दुनिया के किसी भी पहलू के बारे में जब भी पढ़ा और जाना, तो इसको और इससे जुड़े मेर...

कड़कती हैं बिजली, गरजते और बरसते हैं बादल, पर क्यों?

वैसे तो बारिश की अहमियत का बखान करने की कोई ज़रूरत नहीं हैं. पर दिलचस्प बात ये हैं कि जैसा इंतज़ार बारिश का हमारे देश में होता हैं, वैसा मुझे कहीं और देखने नहीं मिला. बारिश में भीगने का रोमांच शायद ही किसी और देश के लोग उठाते होंगे. सावन की बारिश और जवानी के प्यार के बीच का रिश्ता हमारी फ़िल्मी गानों में बखूबी दिखता हैं. मिसाल के तौर पर " टिप-टिप बरसा पानी, पानी ने आग लगायी". पानी आग लगा दे - ऐसे प्रमाण विज्ञान में तो नहीं मिलते हैं और मैंने भी हमेशा पानी को सिर्फ आग भुजाते देखा हैं, आग लगाते नहीं. शायद कवि ने इन अल्फाज़ो को बुनते हुए अपनी मेहबूब को बारिश में भीगते हुए कल्पना की होगी और अपने रोमांच को दिल में लगने वाली आग में पिरो दिया होगा. प्यार से परे लोग भी बारिश में रोमांचित हो ही जाते हैं. थड़ी पर मिलने वाली गरमा-गरम चाय और तेल में सुलगते समोसे-कचोरी और पकोड़ों को बारिश में नज़र अंदाज़ करना मुश्किल होता हैं. बारिश का लुत्फ़ उठाते हुए क्या कभी हम सोचते हैं कि बारिश की बूंदे एक सफर तय करके आती हैं हम तक. बादल बनते हैं, गरजते हैं और बरसते हैं और कड़कती हैं बिजली. पर इतना सब होता ...