दूसरी दुनिया की तलाश में हम
ये और बात हैं कि अक्सर लोग "दुनिया" शब्द का इस्तेमाल अपने असीम और सर्वस्व भाव को दर्शाने के लिए करते हैं. मिसाल के तौर पर घर के बड़े-बुज़ुर्ग अक्सर कहते रहते हैं कि " हमने बहुत दुनिया देखी हैं ", जबकि उनमें से ज्यादातर लोगों ने कभी अपने शहर से बाहर भी कदम नहीं रखा होता हैं. 17 की उम्र में जिससे दिल लगाया, वो भी आये दिन बस यही कहती रहती थी कि मैं ही उसकी दुनिया हूँ. "दुनिया" शब्द को लेकर मेरी सही समझ स्कूली शिक्षा के दौरान बनी. भूगोल की किताब के रंगबिरंगी पन्नों में गढ़ी भौतिक दुनिया. सात महाद्वीपों और पांच विशालकाय समुद्रों से मिलकर बनी दुनिया. वो दुनिया जहाँ इंसानों के हज़ारों सालों का सफर साफ़ दिखाई देता हैं. वो दुनिया जहां इंसानो ने लकीरें बनाई हुयी हैं और आये दिन इसी बात पर झगड़ते रहते हैं. इस दुनिया में भाषाएँ भी बदलती हुई संस्कृतियों के साथ खुद के स्वरुप को बदलती रही हैं. यहां धर्मों ने समाज को एक साथ पिरोया हैं पर समय-समय पर उसको बांटने का कारण भी बना हैं. इस विशाल और विविध दुनिया के किसी भी पहलू के बारे में जब भी पढ़ा और जाना, तो इसको और इससे जुड़े मेर...